नीमराना। ग्राम पंचायत फौलादपुर में आजादी के बाद से लेकर आज तक अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सरपंच पद की सीट आरक्षित नहीं हुई है, जबकि गांव में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 8.35% है जो आरक्षण के सभी मानकों को पूरा करती है। इसी को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि रोस्टर प्रणाली के बावजूद हर बार इस गांव को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे एससी समुदाय को अपना संवैधानिक हक नहीं मिल पा रहा है।

इसी मामले को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम नीमराना से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज करवाई और ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट मनजीत सिंह सामदिया, एडवोकेट जयकिशन, पत्रकार सुनील मेघवाल, कालूराम प्रधान, एडवोकेट देवेंद्र दोसोदीया और सुबेसिंह स्वामी सहित कई ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने एसडीएम से मांग की कि आगामी पंचायत चुनाव में फौलादपुर ग्राम पंचायत को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाए, ताकि वर्षों से वंचित वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस पर उचित कार्रवाई नहीं की तो इस मामले को लेकर जल्द ही हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का प्रश्न है, और वे अपने हक की लड़ाई को हर स्तर पर लड़ेंगे।


